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सुनन इब्न माजा

नंबर 3035

नंबर 3035किताब 25, नंबर 154
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ أَيْمَنَ بْنِ نَابِلٍ، عَنْ قُدَامَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْعَامِرِيِّ، قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ رَمَى الْجَمْرَةَ يَوْمَ النَّحْرِ عَلَى نَاقَةٍ لَهُ صَهْبَاءَ لاَ ضَرْبَ وَلاَ طَرْدَ وَلاَ إِلَيْكَ إِلَيْكَ ‏.‏
It was narrated that Qudamah bin ‘Abdullah Al-‘Amiri said:“I saw the Prophet (ﷺ) stone the Pillar, on the Day of Sacrifice, from atop a reddish-brown camel of his, without beating anyone, driving them off or telling them to go away.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।