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सुनन इब्न माजा

नंबर 3020

नंबर 3020किताब 25, नंबर 139
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ الأَنْصَارِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ الْخَطْمِيِّ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا أَيُّوبَ الأَنْصَارِيَّ، يَقُولُ صَلَّيْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ الْمَغْرِبَ وَالْعِشَاءَ فِي حِجَّةِ الْوَدَاعِ بِالْمُزْدَلِفَةِ ‏.‏
It was narrated from ‘Abdullah bin Yazid Al-Khatmi that he heard Abu Ayyub Al-Ansari say:“I prayed Maghrib and ‘Isha’ with the Messenger of Allah (ﷺ) during the Farewell Pilgrimage, at Muzdalifah.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।