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सुनन इब्न माजा

नंबर 3010

नंबर 3010किताब 25, नंबर 129
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَيَّاشٍ، عَنْ زَيْدِ بْنِ عَلِيٍّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي رَافِعٍ، عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ وَقَفَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ بِعَرَفَةَ فَقَالَ ‏ "‏ هَذَا الْمَوْقِفُ وَعَرَفَةُ كُلُّهَا مَوْقِفٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that ‘Ali said:“The Messenger of Allah (ﷺ) stopped at ‘Arafat and said: ‘This is the place of standing, and all of ‘Arafat is a place of standing.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।