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सुनन इब्न माजा

नंबर 3006

नंबर 3006किताब 25, नंबर 125
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ إِسْرَائِيلَ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ مُهَاجِرٍ، عَنْ يُوسُفَ بْنِ مَاهَكَ، عَنْ أُمِّهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلاَ نَبْنِي لَكَ بِمِنًى بَيْتًا قَالَ ‏ "‏ لاَ مِنًى مُنَاخُ مَنْ سَبَقَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that ‘Aishah said:‘I said: ‘O Messenger of Allah, should we not build you a house in Mina?’ He said: ‘No, Mina is just a stopping place for those who get there first.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।