حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ مِسْعَرٍ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكَ بْنِ مَيْسَرَةَ، عَنْ طَاوُسٍ، عَنْ سُرَاقَةَ بْنِ جُعْشُمٍ، قَالَ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ خَطِيبًا فِي هَذَا الْوَادِي فَقَالَ " أَلاَ إِنَّ الْعُمْرَةَ قَدْ دَخَلَتْ فِي الْحَجِّ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ " .
It was narrated that Suraqah bin Ju’shum said:“The Messenger of Allah (ﷺ) stood up to deliver a speech in this valley, and said: ‘Lo! ‘Umrah has been included in Hajj until the Day of Resurrection.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।