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सुनन इब्न माजा

नंबर 2972

नंबर 2972किताब 25, नंबर 91
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَعْلَى بْنِ حَارِثٍ الْمُحَارِبِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ غَيْلاَنَ بْنِ جَامِعٍ، عَنْ لَيْثٍ، عَنْ عَطَاءٍ، وَطَاوُسٍ، وَمُجَاهِدٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، وَابْنِ، عُمَرَ وَابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ لَمْ يَطُفْ هُوَ وَأَصْحَابُهُ لِعُمْرَتِهِمْ وَحَجَّتِهِمْ حِينَ قَدِمُوا إِلاَّ طَوَافًا وَاحِدًا ‏.‏
It was narrated from Jabir bin ‘Abdullah, Ibn ‘Umar and Ibn ‘Abbas that when the Messenger of Allah (ﷺ) and his Companions came (to Makkah) to perform their Hajj and ‘Umrah, they only performed Tawaf once
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Sahih LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।