सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 2968

नंबर 2968किताब 25, नंबर 87
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ خَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ إِلَى مَكَّةَ فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ ‏ "‏ لَبَّيْكَ عُمْرَةً وَحَجَّةً ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Anas bin Malik said:“We went out with the Messenger of Allah (ﷺ) to Makkah, and I heard him say: ‘Labbaika ‘Umratan wa hajjatan [Here I am (O Allah), for ‘Umrah and Hajj].’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।