حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ طَرِيفٍ، حَدَّثَنَا عِمْرَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ " الْغَازِي فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَالْحَاجُّ وَالْمُعْتَمِرُ وَفْدُ اللَّهِ دَعَاهُمْ فَأَجَابُوهُ وَسَأَلُوهُ فَأَعْطَاهُمْ " .
It was narrated from Ibn ‘Umar that the Prophet (ﷺ) said:“The one who fights in the cause of Allah, and the pilgrim performing Hajj and ‘Umrah are a delegation to Allah. He invited them, so they responded to Him, and they ask Him and He gives to them.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAl-Albani
HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Sanad DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।