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सुनन इब्न माजा

नंबर 2883

नंबर 2883किताब 25, नंबर 2
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، وَعَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ أَبُو إِسْرَائِيلَ، عَنْ فُضَيْلِ بْنِ عَمْرٍو، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ الْفَضْلِ، - أَوْ أَحَدِهِمَا عَنِ الآخَرِ، - قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أَرَادَ الْحَجَّ فَلْيَتَعَجَّلْ فَإِنَّهُ قَدْ يَمْرَضُ الْمَرِيضُ وَتَضِلُّ الضَّالَّةُ وَتَعْرِضُ الْحَاجَةُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn ‘Abbas that Fadl said – or vice verse:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: ‘Whoever intends to perform Hajj, let him hasten to do so, for he may fall sick, lose his mount, or be faced with some need.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।