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सुनन इब्न माजा

नंबर 2868

नंबर 2868किताब 24, नंबर 116
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَتَّابٍ، - مَوْلَى هُرْمُزَ - قَالَ سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ، يَقُولُ بَايَعْنَا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى السَّمْعِ وَالطَّاعَةِ فَقَالَ ‏ "‏ فِيمَا اسْتَطَعْتُمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that ‘Attab, the freed slave of Hurmuz, said:“I heard Anas bin Malik say: ‘We gave our pledge to the Messenger of Allah (ﷺ) on the basis that we would listen and obey. He (ﷺ) said: “As much as you can.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Chapters on Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।