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सुनन इब्न माजा

नंबर 2856

नंबर 2856किताब 24, नंबर 104
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحِيمِ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ حَفْصَةَ بِنْتِ سِيرِينَ، عَنْ أُمِّ عَطِيَّةَ الأَنْصَارِيَّةِ، قَالَتْ غَزَوْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سَبْعَ غَزَوَاتٍ أَخْلُفُهُمْ فِي رِحَالِهِمْ وَأَصْنَعُ لَهُمُ الطَّعَامَ وَأُدَاوِي الْجَرْحَى وَأَقُومُ عَلَى الْمَرْضَى ‏.‏
It was narrated that Umm ‘Atiyyah Al-Ansariyyah said:“I fought alongside the Messenger of Allah (ﷺ) in seven campaigns, looking after their goods, making food for them, tending the wounded and looking after the sick.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Chapters on Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।