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सुनन इब्न माजा

नंबर 2807

नंबर 2807किताब 24, नंबर 55
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدِّمَشْقِيُّ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، حَدَّثَنِي سُلَيْمَانُ بْنُ حَبِيبٍ، قَالَ دَخَلْنَا عَلَى أَبِي أُمَامَةَ فَرَأَى فِي سُيُوفِنَا شَيْئًا مِنْ حِلْيَةِ فِضَّةٍ فَغَضِبَ وَقَالَ لَقَدْ فَتَحَ الْفُتُوحَ قَوْمٌ مَا كَانَ حِلْيَةُ سُيُوفِهِمْ مِنَ الذَّهَبِ وَالْفِضَّةِ وَلَكِنِ الآنُكُ وَالْحَدِيدُ وَالْعَلاَبِيُّ ‏.‏ قَالَ أَبُو الْحَسَنِ الْقَطَّانُ الْعَلاَبِيُّ الْعَصَبُ ‏.‏
Sulaiman bin Habib said:“We entered upon Abu Umamah and he saw some silver ornaments on our swords. He got angry and said: ‘People conquered lands and their swords were not adorned with gold and silver, but with lead and iron and ‘Alabi.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Sahih IsnaadMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Chapters on Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।