सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 2802

नंबर 2802किताब 24, नंबर 50
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، وَأَحْمَدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدَّوْرَقِيُّ، وَبِشْرُ بْنُ آدَمَ، قَالُوا حَدَّثَنَا صَفْوَانُ بْنُ عِيسَى، أَنْبَأَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَجْلاَنَ، عَنِ الْقَعْقَاعِ بْنِ حَكِيمٍ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا يَجِدُ الشَّهِيدُ مَسَّ الْقَتْلِ إِلاَّ كَمَا يَجِدُ أَحَدُكُمْ مَسَّ الْقَرْصَةِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“The martyr does not feel anything more when he is killed than one of you feels if he is pinched (by a bug).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Chapters on Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।