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सुनन इब्न माजा

नंबर 2697

नंबर 2697किताब 22, नंबर 3
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْمِقْدَامِ، حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كَانَتْ عَامَّةُ وَصِيَّةِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حِينَ حَضَرَتْهُ الْوَفَاةُ وَهُوَ يُغَرْغِرُ بِنَفْسِهِ ‏ "‏ الصَّلاَةَ وَمَا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Anas bin Malik said:“What the Messenger of Allah (ﷺ) most enjoined when he was dying and breathing his last was: The prayer; and those whom your right hands possess.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Chapters on Wills

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।