حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ السَّلاَمِ، عَنْ إِسْحَاقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي فَرْوَةَ، عَنْ سَلَمَةَ بْنِ رَوْحِ بْنِ زِنْبَاعٍ، عَنْ جَدِّهِ، أَنَّهُ قَدِمَ عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَقَدْ خَصَى غُلاَمًا لَهُ فَأَعْتَقَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بِالْمُثْلَةِ .
It was narrated from Salamah bin Rawh bin Zinba', that :his grandfather came to the Prophet (ﷺ) and he had castrated a slave of his. The Prophet (ﷺ) manumitted the slave in compensation for having been mutilated
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAl-Albani
Hasan LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।