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सुनन इब्न माजा

नंबर 2581

नंबर 2581किताब 20, नंबर 49
حَدَّثَنَا الْخَلِيلُ بْنُ عَمْرٍو، حَدَّثَنَا مَرْوَانُ بْنُ مُعَاوِيَةَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ سِنَانٍ الْجَزَرِيُّ، عَنْ مَيْمُونِ بْنِ مِهْرَانَ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أُتِيَ عِنْدَ مَالِهِ فُقُوتِلَ فَقَاتَلَ فَقُتِلَ فَهُوَ شَهِيدٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn `Umar that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“If a man's property is targeted, and he is fought and fights back and is killed, he is a martyr.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Chapters on Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।