حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالاَ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ أَبِي الْوَزِيرِ، حَدَّثَنَا الدَّرَاوَرْدِيُّ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ قَوْمًا، أَغَارُوا عَلَى لِقَاحِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَطَعَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم أَيْدِيَهُمْ وَأَرْجُلَهُمْ وَسَمَلَ أَعْيُنَهُمْ .
It was narrated from 'Aishah that :some people raided the she-camels of the Messenger of Allah (ﷺ) , so the Prophet(ﷺ) cut off their hands and feet (on opposite sides) and lanced (gouged out) their eyes
स्रोत में दर्ज दर्जे
Sahih IsnaadAl-Albani
Sahih IsnaadMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Isnaad SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।