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सुनन इब्न माजा

नंबर 2559

नंबर 2559किताब 20, नंबर 27
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ الْوَلِيدِ الدِّمَشْقِيُّ، حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ عُبَيْدٍ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي جَعْفَرٍ، عَنْ أَبِي الأَسْوَدِ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَوْ كُنْتُ رَاجِمًا أَحَدًا بِغَيْرِ بَيِّنَةٍ لَرَجَمْتُ فُلاَنَةَ فَقَدْ ظَهَرَ فِيهَا الرِّيبَةُ فِي مَنْطِقِهَا وَهَيْئَتِهَا وَمَنْ يَدْخُلُ عَلَيْهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn`Abbas that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“If I were to stone anyone without proof, I would have stoned so-and-so, for there is obviously doubt concerning her speech, her appearance and those who enter upon her.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Chapters on Legal Punishments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।