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सुनन इब्न माजा

नंबर 701

नंबर 701किताब 2, नंबर 35
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، وَعَبْدُ الْوَهَّابِ، قَالُوا حَدَّثَنَا عَوْفٌ، عَنْ أَبِي الْمِنْهَالِ، سَيَّارِ بْنِ سَلاَمَةَ عَنْ أَبِي بَرْزَةَ الأَسْلَمِيِّ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَسْتَحِبُّ أَنْ يُؤَخِّرَ الْعِشَاءَ وَكَانَ يَكْرَهُ النَّوْمَ قَبْلَهَا وَالْحَدِيثَ بَعْدَهَا ‏.‏
It was narrated that Abu Barzah Al-Aslami said:"The Messenger of Allah used to like to delay the 'Isha', and he disliked sleeping before it, and engaging in conversation after it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book of the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।