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सुनन इब्न माजा

नंबर 688

नंबर 688किताब 2, नंबर 22
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ، حَدَّثَنَا الْمُغِيرَةُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي عُبَيْدٍ، عَنْ سَلَمَةَ بْنِ الأَكْوَعِ، أَنَّهُ كَانَ يُصَلِّي مَعَ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ الْمَغْرِبَ إِذَا تَوَارَتْ بِالْحِجَابِ ‏.‏
It was narrated from Salamah bin Akwa' that:He used to pray the Maghrib with the Messenger of Allah when the sun set
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book of the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।