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सुनन इब्न माजा

नंबर 684

नंबर 684किताब 2, नंबर 18
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ بَهْدَلَةَ، عَنْ زِرِّ بْنِ حُبَيْشٍ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ يَوْمَ الْخَنْدَقِ ‏ "‏ مَلأَ اللَّهُ بُيُوتَهُمْ وَقُبُورَهُمْ نَارًا كَمَا شَغَلُونَا عَنِ الصَّلاَةِ الْوُسْطَى ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Ali bin Abu Talib that,:On the Day of Khandaq, the Messenger of Allah said: "May Allah fill their houses and graves with fire, just as they distracted us from the middle prayer
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book of the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।