حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ هِشَامٍ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ زَيْدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنْ خِشْفِ بْنِ مَالِكٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ، قَالَ شَكَوْنَا إِلَى النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ حَرَّ الرَّمْضَاءِ فَلَمْ يُشْكِنَا .
It was narrated that 'Abdullah bin Mas'ud said:"We complained to the Messenger of Allah about the heat of the sunbaked ground, but he did not respond to our complaint
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
Sahih LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।