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सुनन इब्न माजा

नंबर 674

नंबर 674किताब 2, नंबर 8
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ عَوْفِ بْنِ أَبِي جَمِيلَةَ، عَنْ سَيَّارِ بْنِ سَلاَمَةَ، عَنْ أَبِي بَرْزَةَ الأَسْلَمِيِّ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يُصَلِّي صَلاَةَ الْهَجِيرِ الَّتِي تَدْعُونَهَا الظُّهْرَ إِذَا دَحَضَتِ الشَّمْسُ ‏.‏
It was narrated that Abu Barzah Al-Aslami said:"The Prophet used to pray the Hajir prayer, which you call 'Zuhr', when the sun had passed its zenith
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book of the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।