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सुनन इब्न माजा

नंबर 2526

नंबर 2526किताब 19, नंबर 15
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاوِيَةَ الْجُمَحِيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُمْهَانَ، عَنْ سَفِينَةَ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ أَعْتَقَتْنِي أُمُّ سَلَمَةَ وَاشْتَرَطَتْ عَلَىَّ أَنْ أَخْدُمَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم مَا عَاشَ ‏.‏
It was narrated from that Safinah - Abu 'Abdur-Rahman-said :“Umm Salamah freed me but stipulated that I should serve the Prophet (ﷺ) as long he lived.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · The Chapters on Manumission (of Slaves)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।