सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 2513

नंबर 2513किताब 19, नंबर 2
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ دَبَّرَ رَجُلٌ مِنَّا غُلاَمًا وَلَمْ يَكُنْ لَهُ مَالٌ غَيْرُهُ فَبَاعَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَاشْتَرَاهُ ابْنُ النَّحَّامِ رَجُلٌ مِنْ بَنِي عَدِيٍّ ‏.‏
It was narrated that Jabir bin 'Abdullah said:“A man among us promised freedom to a slave after his death, and he did not have any property other than him (this slave). So the Prophet (ﷺ) sold him, and Ibn (Nahham), a man from Banu 'Adi, bought him.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih HadithAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · The Chapters on Manumission (of Slaves)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।