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सुनन इब्न माजा

नंबर 2466

नंबर 2466किताब 16, नंबर 31
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَامِرِ بْنِ زُرَارَةَ، حَدَّثَنَا شَرِيكٌ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ زَرَعَ فِي أَرْضِ قَوْمٍ بِغَيْرِ إِذْنِهِمْ فَلَيْسَ لَهُ مِنَ الزَّرْعِ شَىْءٌ وَتُرَدُّ عَلَيْهِ نَفَقَتُهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Rafi` bin Khadij said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: 'Whoever cultivates people`s land without their permission, he has no right to any produce, but he should be recompensed for his expenditure.' ”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Chapters on Pawning

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।