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सुनन इब्न माजा

नंबर 2421

नंबर 2421किताब 15, नंबर 32
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ خَلَفٍ الْعَسْقَلاَنِيُّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي مَرْيَمَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي جَعْفَرٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، وَعَائِشَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ طَلَبَ حَقًّا فَلْيَطْلُبْهُ فِي عَفَافٍ وَافٍ أَوْ غَيْرِ وَافٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar and 'Aishah that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Whoever demands his rights let him do so in a decent manner as much as he can.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Chapters on Charity

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।