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सुनन इब्न माजा

नंबर 2414

नंबर 2414किताब 15, नंबर 25
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ ثَعْلَبَةَ بْنِ سَوَاءٍ، حَدَّثَنَا عَمِّي، مُحَمَّدُ بْنُ سَوَاءٍ عَنْ حُسَيْنٍ الْمُعَلِّمِ، عَنْ مَطَرٍ الْوَرَّاقِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ مَاتَ وَعَلَيْهِ دِينَارٌ أَوْ دِرْهَمٌ قُضِيَ مِنْ حَسَنَاتِهِ لَيْسَ ثَمَّ دِينَارٌ وَلاَ دِرْهَمٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Whoever dies owing a Dinar or a Dirham, it will be paid back from his good deeds, because then there will be no Dinar or Dirham.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Chapters on Charity

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।