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सुनन इब्न माजा

नंबर 2340

नंबर 2340किताब 13, नंबर 33
حَدَّثَنَا عَبْدُ رَبِّهِ بْنُ خَالِدٍ النُّمَيْرِيُّ أَبُو الْمُغَلِّسِ، حَدَّثَنَا فُضَيْلُ بْنُ سُلَيْمَانَ، حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عُقْبَةَ، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ يَحْيَى بْنِ الْوَلِيدِ، عَنْ عُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَضَى أَنْ ‏ "‏ لاَ ضَرَرَ وَلاَ ضِرَارَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Ubadah bin Samit that the Messenger of Allah (ﷺ) ruled:“There should be neither harming nor reciprocating harm.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Chapters on Rulings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।