حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ أَبِي سَهْلٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ كُنَّا نَشْتَرِي الطَّعَامَ مِنَ الرُّكْبَانِ جِزَافًا فَنَهَانَا رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَنْ نَبِيعَهُ حَتَّى نَنْقُلَهُ مِنْ مَكَانِهِ .
It was narrated that Ibn 'Umar said:"We used to buy food from troops of riders (i.e., the caravans) without knowing the amount, but the Messenger of Allah (ﷺ) forbade us to sell it until it had been delivered to us
स्रोत में दर्ज दर्जे
Sahih HadithAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।