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सुनन इब्न माजा

नंबर 2122

नंबर 2122किताब 11, नंबर 33
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُرَّةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَنِ النَّذْرِ وَقَالَ ‏ "‏ إِنَّمَا يُسْتَخْرَجُ بِهِ مِنَ اللَّئِيمِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Abdullah bin 'Umar said:"The Messenger of Allah (ﷺ) forbade vows and said: 'They are just a means of taking wealth from the miserly
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Chapters on Expiation

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।