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सुनन इब्न माजा

नंबर 619

नंबर 619किताब 1, नंबर 353
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُصَفَّى الْحِمْصِيُّ، حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ، عَنْ حَبِيبِ بْنِ صَالِحٍ، عَنْ أَبِي حَىٍّ الْمُؤَذِّنِ، عَنْ ثَوْبَانَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ لاَ يَقُومُ أَحَدٌ مِنَ الْمُسْلِمِينَ وَهُوَ حَاقِنٌ حَتَّى يَتَخَفَّفَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Thawban that:The Messenger of Allah said: "No one among the Muslims should stand to pray when he is suppressing (the need to urinate or defecate), until he has to relieve himself
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Purification and its Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।