حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ عَبْدِ الْعَظِيمِ الْعَنْبَرِيُّ، وَأَبُو حَفْصٍ عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ الْفَلاَّسُ وَمُجَاهِدُ بْنُ مُوسَى قَالُوا حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ الْوَلِيدِ، أَخْبَرَنِي مُحِلُّ بْنُ خَلِيفَةَ، حَدَّثَنِي أَبُو السَّمْحِ، قَالَ كُنْتُ أَخْدُمُ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَكَانَ إِذَا أَرَادَ أَنْ يَغْتَسِلَ قَالَ " وَلِّنِي " . فَأُوَلِّيهِ قَفَاىَ وَأَنْشُرُ الثَّوْبَ فَأَسْتُرُهُ بِهِ .
Abu Samh said:"I used to serve the Prophet, and when he wanted to take a bath he would say: 'Turn your back to me.' So I would turn my back and hung up a cloth, and concealed him with it
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Isnaad SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।