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सुनन इब्न माजा

नंबर 553

नंबर 553किताब 1, नंबर 287
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ، عَنْ خُزَيْمَةَ بْنِ ثَابِتٍ، قَالَ جَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ لِلْمُسَافِرِ ثَلاَثًا وَلَوْ مَضَى السَّائِلُ عَلَى مَسْأَلَتِهِ لَجَعَلَهَا خَمْسًا ‏.‏
It was narrated that Khuzaimah bin Thabit said:"The Messenger of Allah set a time limit for the traveler of three days, and if the questioner had persisted in asking, he would have made it five (days)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Purification and its Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।