حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا دَلْهَمُ بْنُ صَالِحٍ الْكِنْدِيُّ، عَنْ حُجَيْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْكِنْدِيِّ، عَنِ ابْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ النَّجَاشِيَّ، أَهْدَى لِلنَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ خُفَّيْنِ أَسْوَدَيْنِ سَاذَجَيْنِ فَلَبِسَهُمَا ثُمَّ تَوَضَّأَ وَمَسَحَ عَلَيْهِمَا .
It was narrated from Abu Buraidah from his father that:An-Najashi gave the Prophet a gift of a pair of plain black leather socks. He put them on, then he (performed ablution and) wiped over them
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAl-Albani
HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Hasan LighairihiShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।