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सुनन इब्न माजा

नंबर 518

नंबर 518किताब 1, नंबर 252
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ الْمُنْذِرِ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ إِذَا كَانَ الْمَاءُ قُلَّتَيْنِ أَوْ ثَلاَثًا لَمْ يُنَجِّسْهُ شَىْءٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو الْحَسَنِ بْنُ سَلَمَةَ حَدَّثَنَا أَبُو حَاتِمٍ، حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ، وَأَبُو سَلَمَةَ وَابْنُ عَائِشَةَ الْقُرَشِيُّ قَالُوا حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، فَذَكَرَ نَحْوَهُ ‏.‏
It was narrated from 'Ubaidullah bin 'Abdullah bin 'Umar that his father said:"The Messenger of Allah said: 'If the water is the amount of two or three Qullah, nothing can make it impure (Najis).'" (Sahih) Another chain with similar wording
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book of Purification and its Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।