حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، قَالَ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَعِيدٍ، وَعَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ، عَنْ عَمِّهِ، قَالَ شُكِيَ إِلَى النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ الرَّجُلُ يَجِدُ الشَّىْءَ فِي الصَّلاَةِ فَقَالَ " لاَ حَتَّى يَجِدَ رِيحًا أَوْ يَسْمَعَ صَوْتًا " .
Abbad bin Tamim narrated that his paternal uncle said:"A complaint was made to the Prophet about a man who sensed something (some doubt about his ablution) during prayer. He said: 'No (he does not have to perform ablution) unless he notices a smell or hears a sound
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।