حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا بْنُ أَبِي زَائِدَةَ، قَالَ قَالَ مَنْصُورٌ حَدَّثَنَا مُجَاهِدٌ، عَنِ الْحَكَمِ بْنِ سُفْيَانَ الثَّقَفِيِّ، أَنَّهُ رَأَى رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ تَوَضَّأَ ثُمَّ أَخَذَ كَفًّا مِنْ مَاءٍ فَنَضَحَ بِهِ فَرْجَهُ .
It was narrated from Hakam bin Sufyan Ath-Thawri that:He saw the Messenger of Allah perform ablution then take a handful of water and sprinkle it over his private area to remove any doubts about urine drippings
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।