حَدَّثَنَا أَبُو بَدْرٍ، عَبَّادُ بْنُ الْوَلِيدِ حَدَّثَنَا مُطَهَّرُ بْنُ الْهَيْثَمِ، حَدَّثَنَا عَلْقَمَةُ بْنُ أَبِي جَمْرَةَ الضُّبَعِيُّ، عَنْ أَبِيهِ أَبِي جَمْرَةَ الضُّبَعِيِّ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ لاَ يَكِلُ طُهُورَهُ إِلَى أَحَدٍ وَلاَ صَدَقَتَهُ الَّتِي يَتَصَدَّقُ بِهَا يَكُونُ هُوَ الَّذِي يَتَوَلاَّهَا بِنَفْسِهِ .
It was narrated that Ibn 'Abbas said:"The Messenger of Allah never entrusted his purification to anyone nor his charity that he had given to anyone; he would be the one to take care of these matters himself
स्रोत में दर्ज दर्जे
Very DaifAl-Albani
Very DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Very DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।