حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا أَبَانُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ جَرِيرٍ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ دَخَلَ الْغَيْضَةَ فَقَضَى حَاجَتَهُ فَأَتَاهُ جَرِيرٌ بِإِدَاوَةٍ مِنْ مَاءٍ فَاسْتَنْجَى مِنْهَا وَمَسَحَ يَدَهُ بِالتُّرَابِ .
Ibrahim bin Jarir narrated from his father that :The Prophet of Allah entered a thicket and relieved himself, then Jarir brought him a small water skin from which he cleansed himself, then he wiped his hand in the dirt
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAl-Albani
Hasan LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Hasan LighairihiShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।