حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حُمَيْدٍ، حَدَّثَنَا الْحَكَمُ بْنُ بَشِيرِ بْنِ سَلْمَانَ، حَدَّثَنَا خَلاَّدٌ الصَّفَّارُ، عَنِ الْحَكَمِ النَّصْرِيِّ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ أَبِي جُحَيْفَةَ، عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " سِتْرُ مَا بَيْنَ الْجِنِّ وَعَوْرَاتِ بَنِي آدَمَ إِذَا دَخَلَ الْكَنِيفَ أَنْ يَقُولَ بِسْمِ اللَّهِ " .
It was narrated that 'Ali said:"The Messenger of Allah said: 'The screen between the Jinn and the nakedness of the sons of Adam is that when a person enters the Kanif, he should say: Bismillah (in the name of Allah)
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।