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सुनन इब्न माजा

नंबर 48

नंबर 48किताब 0, नंबर 48
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُنْذِرِ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ، ح وَحَدَّثَنَا حَوْثَرَةُ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ دِينَارٍ، عَنْ أَبِي غَالِبٍ، عَنْ أَبِي أُمَامَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏"‏ مَا ضَلَّ قَوْمٌ بَعْدَ هُدًى كَانُوا عَلَيْهِ إِلاَّ أُوتُوا الْجَدَلَ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ تَلاَ هَذِهِ الآيَةَ {بَلْ هُمْ قَوْمٌ خَصِمُونَ}‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Umamah said:"The Messenger of Allah (ﷺ) said: 'No people go astray after having followed right guidance, but those who indulge in disputes.' Then he recited the Verse: "Nay! But they are a quarrelsome people
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

The Book of the Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।