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सुनन इब्न माजा

नंबर 44

नंबर 44किताब 0, नंबर 44
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَكِيمٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ الصَّبَّاحِ الْمِسْمَعِيُّ، حَدَّثَنَا ثَوْرُ بْنُ يَزِيدَ، عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَمْرٍو، عَنِ الْعِرْبَاضِ بْنِ سَارِيَةَ، قَالَ صَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ صَلاَةَ الصُّبْحِ ثُمَّ أَقْبَلَ عَلَيْنَا بِوَجْهِهِ فَوَعَظَنَا مَوْعِظَةً بَلِيغَةً ‏.‏ فَذَكَرَ نَحْوَهُ ‏.‏
It was narrated from 'Irbad bin Sariyah said:"The Messenger of Allah (ﷺ) led us in Fajr (morning) prayer, then he turned to us and delivered an eloquent speech". And he mentioned something similar (as no)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

The Book of the Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।