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सुनन इब्न माजा

नंबर 258

नंबर 258किताब 0, नंबर 258
حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ أَخْزَمَ، وَأَبُو بَدْرٍ عَبَّادُ بْنُ الْوَلِيدِ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ الْهُنَائِيُّ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُبَارَكِ الْهُنَائِيُّ، عَنْ أَيُّوبَ السَّخْتِيَانِيِّ، عَنْ خَالِدِ بْنِ دُرَيْكٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ مَنْ طَلَبَ الْعِلْمَ لِغَيْرِ اللَّهِ أَوْ أَرَادَ بِهِ غَيْرَ اللَّهِ فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنَ النَّارِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that:The Prophet said: "Whoever seeks knowledge for a reason other than the sake of Allah, or intends it for a purpose other than for the sake of Allah, let him take his place in hell
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

The Book of the Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।