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सुनन इब्न माजा

नंबर 253

नंबर 253किताब 0, नंबर 253
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، حَدَّثَنَا أَبُو كَرِبٍ الأَزْدِيُّ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ مَنْ طَلَبَ الْعِلْمَ لِيُمَارِيَ بِهِ السُّفَهَاءَ أَوْ لِيُبَاهِيَ بِهِ الْعُلَمَاءَ أَوْ لِيَصْرِفَ وُجُوهَ النَّاسِ إِلَيْهِ فَهُوَ فِي النَّارِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that:The Messenger of Allah said: "Whoever seeks knowledge in order to argue with the foolish, or to show off before the scholars, or to attract people's attention, will be in Hell
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Hasan LighairihiShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

The Book of the Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।