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सुनन इब्न माजा

नंबर 246

नंबर 246किताब 0, नंबर 246
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنِ الأَسْوَدِ بْنِ قَيْسٍ، عَنْ نُبَيْحٍ الْعَنَزِيِّ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ إِذَا مَشَى مَشَى أَصْحَابُهُ أَمَامَهُ وَتَرَكُوا ظَهْرَهُ لِلْمَلاَئِكَةِ ‏.‏
It was narrarted that Jabir bin 'Abdullah said:"When the Prophet walked, his Companions would walk in front of him, and he would leave his back for the angels
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

The Book of the Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।