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सुनन इब्न माजा

नंबर 243

नंबर 243किताब 0, नंबर 243
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ الْمَدَنِيُّ، حَدَّثَنِي إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ طَلْحَةَ، عَنِ الْحَسَنِ الْبَصْرِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ أَفْضَلُ الصَّدَقَةِ أَنْ يَتَعَلَّمَ الْمَرْءُ الْمُسْلِمُ عِلْمًا ثُمَّ يُعَلِّمَهُ أَخَاهُ الْمُسْلِمَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that:The Prophet said: "The best of charity is when a Muslim man gains knowledge, then he teaches it to his Muslim brother
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

The Book of the Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।