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सुनन इब्न माजा

नंबर 235

नंबर 235किताब 0, नंबर 235
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ، أَنْبَأَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ الدَّرَاوَرْدِيُّ، حَدَّثَنِي قُدَامَةُ بْنُ مُوسَى، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْحُصَيْنِ التَّمِيمِيِّ، عَنْ أَبِي عَلْقَمَةَ، مَوْلَى ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ يَسَارٍ، مَوْلَى ابْنِ عُمَرَ عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ لِيُبَلِّغْ شَاهِدُكُمْ غَائِبَكُمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that:The Messenger of Allah said: "Let those of you who are present convey it to those of you who are absent
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

The Book of the Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।