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सुनन इब्न माजा

नंबर 166

नंबर 166किताब 0, नंबर 166
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ خَلاَّدٍ الْبَاهِلِيُّ قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ الْحَذَّاءُ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ ضَمَّنِي رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ إِلَيْهِ وَقَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ عَلِّمْهُ الْحِكْمَةَ وَتَأْوِيلَ الْكِتَابِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Abbas said:"The Messenger of Allah embraced me and said: 'O Allah, teach him wisdom and the (correct) interpretation of the Book
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

The Book of the Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।