حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، وَعَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ نُسَيْرِ بْنِ ذُعْلُوقٍ، قَالَ كَانَ ابْنُ عُمَرَ يَقُولُ لاَ تَسُبُّوا أَصْحَابَ مُحَمَّدٍ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَلَمَقَامُ أَحَدِهِمْ سَاعَةً خَيْرٌ مِنْ عَمَلِ أَحَدِكُمْ عُمْرَهُ .
It was narrated that Nusair bin Dhu'luq said:"Ibn 'Umar used to say: 'Do not revile the Companions of Muhammed, for the stay of anyone of them for a brief period (with the Prophet) is better than all the good deeds that anyone of you does in his lifetime
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAl-Albani
HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।